हर तरफ उठापटक से रोचक हुई बंगाल की लड़ाई
नई दिल्ली
भाजपा के असंतोष और कुछ उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने से इंकार करने के बाद तृणमूल कांग्रेस का खेमा उत्साहित है। पार्टी इसे मतदान के पूर्व राज्य के मतदाताओं का अपने पक्ष में बन रहे रुझान के रूप में प्रचारित कर रही है। पार्टी का ये भी मानना है कि जिस तरह से टीएमसी से टूटकर पार्टी के तमाम नेता भाजपा में गए थे उससे माहौल थोड़ा प्रतिकूल जरूर हुआ था। लेकिन भाजपा में टिकट को लेकर असंतोष और कुछ उम्मीदवारों के चुनाव लड़ने से इंकार के बाद अब भाजपा का दांव उल्टा भी पड़ सकता है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि टीएमसी का उत्साह अनायास नहीं है। तृणमूल से नेताओं के टूटने से जमीनी कार्यकर्ताओं में भ्रम हो रहा था। पार्टी के खिलाफ माहौल को जमीन पर प्रभावी बनाने का प्रयास भी हो रहा था। लेकिन विरोधी खेमे में बन रही स्थिति से तृणमूल कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ेगा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बंगाल में लड़ाई आसान नहीं है। भाजपा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि और उनकी सभाओं से बड़े उलटफेर की उम्मीद है। लेकिन ममता का दांव भी कई मामलों में सटीक साबित हुआ है। शुरू में हुए नुकसान की उन्होंने काफी हद तक भरपाई की है। जानकारों का कहना है कि जमीनी माहौल की जानकारी भाजपा को भी है। पार्टी रणनीतिक रूप से अभी कई मोहरों का इस्तेमाल आखिरी वक्त पर कर सकती है।
तृणमूल के नेताओं का दावा है कि फिलहाल भाजपा के पास ढंग के उम्मीदवारों का टोटा हो गया है। इसलिए उसे सांसदों को उतारना पड़ रहा है। बाहर से आए नेताओं पर दांव लगाना पड़ रहा है। पार्टी आपाधापी में उन लोगों को भी उम्मीदवार बना रही है जो उनकी पार्टी में कभी शामिल ही नहीं हुए। लेकिन वास्तव में असंतोष टीएमसी में भी कम नही है। विधानसभा चुनावों का टिकट नहीं मिलने की वजह से टीएमसी के कई पूर्व विधायकों में भी नाराजगी है। उम्मीदवारों की सूची जारी होने के बाद कम से कम सात नेता भाजपा में शामिल हो गए हैं। इनमें कभी ममता बनर्जी की करीबी रहीं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सोनाली गुहा भी शामिल हैं। दो बार विधायक रहीं अभिनेत्री देवश्री राय भी टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है। इसके अलावा कुछ उम्मीदवार निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतर गए हैं तो कुछ अब भी भाजपा से टिकट की आस लगाए बैठे हैं। बीते साल दिसंबर से अब तक टीएमसी के कम से कम डेढ़ दर्जन विधायक और नेता भाजपा में शामिल हो चुके हैं। फिलहाल जानकार मानते हैं कि मुकाबला नजदीकी है और कौन किसके असंतोष को भुनाएगा अभी कयास लगाना भी मुश्किल है।

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